11th June 2021

मेरी संगीत यात्रा : डॉ पूजा दीवान

M for Music, M for Medicine और M for Moral values .. इन तीनों के साथ बुनी गयी है एक खूबसूरत शख्सियत , कुछ  ऐसा है उनका अंदाज़ कि दिलोदिमाग में मिठास सी घुल जाती है जब वो गाती हैं और बेचैन मरीज़ को एक तसल्ली सी बंध जाती है जब वो बात करती हैं, ये वो कलाकार हैं  जिन्हें तानपुरे से जितना प्यार है उतना ही लगाव अपने स्टेस्थ्कोप से है , समर्पित  गायिका और अनुभवी  gynecologist  का संगम है उनका व्यक्तित्व , जिनका  नाम है डॉक्टर पूजा दीवान

पूजा बताती हैं जहाँ तक याद है गान शुरू से ही अच्छा लगता था , लेकिन उपलब्धियों के सफ़र में आवाज़ की वो लरज़ , वो गमक कही छूट गई, तेज़ी से गुज़रते वक़्त के साथ हर कदम एक नयी मंजिल जिसमे लन्दन , ब्रिटेन में रॉयल कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन और गायनोकोलॉजिस्ट की फेलोशिप  और मेडिकल साइंस में पीएचडी की डिग्री  शामिल थी , लेकिन मन में कहीं एक कोना अभी भी महफूज़ था , वो कोना जहाँ नन्ही पूजा के गाने की लगन अभी भी ताज़ा थी , वही लगन जो उन्हें शुरू से सबके सामने गाने को उकसाती थी, मौका आया जब वो कक्षा चार में थीं , “लेकिन वो चांस आसानी से नहीं मिला” ये बताते हुए पूजा याद करती हैं “बहुत मन था मेरा , मौका दूसरी लड़की को मिला लेकिन कम्पीटीशन से एक दिन पहले ,उसका गला ख़राब हो गया,और मुझसे कहा गया कि अब तुम्हे गाना होगा, उन दिनों मैं राजस्थानी लोक संगीत और जयपुर घराने की निपुण आदरणीय  उर्मिला नागर जी से भजन सीख रही थी, मैंने मीरा का वही भजन कम्पीटीशन में गाया और मुझे कॉन्सोलेशन प्राइज मिला “

पूजा बताती हैं वो पुरूस्कार लेते वक़्त ख़ुशी के साथ उनके मन में अकेले स्टेज पर गाने का चाव भी पनप गया था .

फिर भी पूजा दीवान का लक्ष्य चिकित्सा जगत में था और उसे ही प्राप्त करने की तैयारी में एक बार फिर उन्हें मौका मिला , उस मौके की याद करते हुए पूजा के होठों पर मुस्कान तैर जाती है ‘”उन दिनों एम बी बी एस के फिफ्थ इयर में थी , उन दिनों टी वी के मशहूर अन्ताक्षरी शो में एक प्रतियोगिताहुई,  जिसमे मेडिकल,इंजीनियरिंग और एम बी ए  कालेज के छात्रों ने भाग लिया, उस प्रति

योगिता में मैं काफी आगे लेवल तक पहुच गई , उन दिनों मैं  चश्मा लगाती थी अब  शूटिंग के दिन  नयी किस्म का कान्टेक्ट लेंस ट्राई करने का मन हुआ सो वो कान्टेक्ट लेंस लगाकर मैं पहुच गई , शूटिंग के लिए हमें जहाँ बैठाया गया वहां काफी सारी लाइट्स लगीं थीं ,उस राउंड में दूर से टी वी देखकर गाने को पहचानना था और बज़र दबाना था , यहाँ हाल ये था की लाइट्स की गर्मी से पिघलकर लेंस मेरे हाथ में आ गए , अब टी वी पर गाना पहचानना मुश्किल था , लकिली मेरे पेरेंट्स ऑडियंस में बैठे थे , जब उन्हें पता लगा तो वो फ़ौरन घर से मेरा चश्मा लेकर आये, शूटिंग शुरू हुई” वो खूबसूरत याद पूजा की आँखों में तैर जाती है जब अनेक राउंड्स को पार करते हुए  पूजा अन्ताक्षरी शो के इंडिया लेवल तक पहुचीं .

संगीत यात्रा के ये चंद  पड़ाव उनके लिए यादगार रहे लेकिन वक़्त  के साथ उनकी पढ़ाई पूरी हुई और डॉक्टर  के प्रोफेशन में गुनगुनाने की मोहलत मिलनी भी बंद हो गई , पूजा एक सफल चिकित्सक बन चुकी थीं , उन्ही दिनों वो दिल्ली से मुंबई शिफ्ट हुई थी तभी एक बार फिर मन के सुर छिड़ गए ,” हुआ यूँ कि मैं रोज़ अपने बेटे को स्कूल बस तक छोड़ने जाती थी , तभी एक दिन मेरी नज़र एक पेड़ पर पड़ी जिस पर संगीत सिखाने वाले का नंबर लिखा था , वहीँ से एक बार फिर गुरु की खोज शुरू हुई ”

पूजा के जीवन में संगीत फिर लौटा और रच-बस गया .आज डॉक्टर  पूजा  दीवान एक ऐसी चिकित्सक के रूप में जानी जाती हैं जो बीस साल के अनुभव के साथ स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं ,Infertility,IVF और Laparoscopy एक्सपर्ट हैं . दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल , मैक्स हॉस्पिटल और  मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल  में  सक्प्रसेज़फुल  गायनेकौलोजिस्ट के रूप में मशहूर डॉक्टर पूजा दीवान लगातार संगीत विशारद और ध्रुपद धमार में प्रशिक्षित हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका हैं।

 

उन्हें 2019-20 में बेस्ट मेडिकल प्रैक्टिशनर, बेस्ट इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, लीजेंड्स ऑफ इंडिया, बेस्ट रिसर्चर अवार्ड, सबसे

भरोसेमंद स्त्री रोग विशेषज्ञ आदि कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।

उनकी संगीत यात्रा में, टाइम्स म्यूजिक के प्रतिष्ठित लेबल के तहत संगीत एल्बम सुमिरानी के भावपूर्ण भक्तिपूर्ण आध्यात्मिक गीतों का विमोचन शामिल है।  वह अंताक्षरी सहित विभिन्न टीवी और रेडियो शो में दिखाई दी हैं और उन्होंने विभिन्न लाइव शो भी किए हैं।घर पर रहे घर पर सुने नामक संगीत  अभियान में पूजा अब तक दो भजन गा चुकी हैं , इनमे एक भजन सोलो और एक भजन पद्मश्री अनूप जलोटा के साथ गाया है .

 

 

 

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