26th November 2021

दिल के टुकडे़-टुकडे़ करके मुस्करा के चल दिये:अभिनेता विनोद मेहरा पर ख़ास पेशकश

दिल के टुकडे़-टुकडे़ करके मुस्करा के चल दिये

‘‘गीत गाता हूं मैं, मुस्कराता हूं मैं, मैंने हंसने का वादा किया था कभी, इसलिए अब सदा मुस्कराता हूं मैं’’। गीतकार देव कोहली ने फिल्म ‘लाल पत्थर’ में ये गीत फिल्म के नायक के लिए भले ही लिखा हो, परंतु इस नायक को दर्शकों ने जब भी सिनेमा के पर्दे पर देखा, अपनी सकारात्मक मुस्कराहट से उसने सभी के दिलों को जीत लिया।
यही वजह थी कि दर्शकों ने भी जब उन्हें सिनेमा के पर्दे पर देखा, उन्होंने भी यही गुनगुनाया ‘‘दिल के टुकड़े टुकड़े करके मुस्करा के चल दिये’’। मनमोहक मुस्कराहट, हैंडसम पर्सनलिटी और चॉकलेटी हीरो के रुप में जाने जाने वाले ये लोकप्रिय नायक थे विनोद मेहरा ।
संजीदा, गंभीर, कुशल इंस्पेक्टर, ऑफिसर, कुशल भाई, मित्र व पिता इन अलग-अलग भूमिकाओं को निभाने वाले विनोद मेहरा का जन्म हुआ था अमृतसर, पंजाब में एक कपड़ा व्यापारी के घर में, साल था 1945 और तारीख 13 फरवरी ।
करियर की शुरुआत की विनोद मेहरा ने एक बाल कलाकार के रुप में। कई विज्ञापनों में भी उन्होंने काम किया। आदिल-ए-जहांगीर (1955), पतित पावन (1955), शारदा (1957), दुनिया रंग रंगीली, भक्त धु्रव, रागिनी (1958), बालयोगी, उनमन्यु (1958), बेवकूफ (1960) तथा अंगुलीमाल (1960) जैसी कई सामाजिक व धार्मिक फिल्मों में उन्होंने एक बाल कलाकार के रुप में काम किया।
बहुत कम सिनेमा प्रेमी ये जानते हैं कि फिल्म शारदा में राजकपूर के छोटे भाई की भूमिका और फिल्म रागिनी में नायक किशोर कुमार के बचपन की भूमिका विनोद मेहरा ने ही मासूम व भोले भाले बाल कलाकार के रुप में ही निभाई ंथी।
नायक के रुप में उनकी सबसे पहली फिल्म थी 1971 में प्रदर्शित ‘एक थी रीटा’ जिसमें उनके साथ थीं अभिनेत्री तनूजा। फिल्म बहुत अधिक कामयाब तो नहीं हुई परंतु बतौर नायक दर्शकों ने विनोद मेहरा के किरदार और उनके अभिनय को पसंद किया ।
विनोद मेहरा कई फिल्मों में मुख्य नायक तो बने परंतु अधिकांश फिल्में जिसमें उन्होंने काम किया उन फिल्मों में वे नजर आये सहनायक व सेकेंड लीड हीरो की भूमिकाओं में, इसकी मुख्य वजह थी उस समय मल्टी स्टारर फिल्मों का दौर।

70 के दशक के प्रारंभ में परदे के पीछे, एलान, अमर प्रेम और लाल पत्थर विनोद मेहरा की प्रमुख फिल्में थीं। 1972 में उनकी सबसे कामयाब फिल्म थी सुप्रसिद्ध निर्माता निदेशक शक्ति सामंत की ‘अनुराग’, जिसमें उनकी नायिका थी मौसमी चटर्जी, सिल्वर जुबली हिट इस फिल्म की कहानी, आनंद बख्शी के गीत व सचिन देव बर्मन का संगीत इन सभी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। फिल्म के सभी गीतों ने लोकप्रियता पाई, खासकर विनोद मेहरा और मौसमी चटर्जी पर फिल्माया गया मो0 रफी व लता मंगेशकर की आवाज में तेरे नैनों की मैं जोत जगाउंगा, इस गीत को संगीतप्रेमियों द्वारा खूब सराहा गया।
विनोद मेहरा ने अपने समय की कई नायिकाओं के साथ बतौर नायक अभिनय किया, परंतु उनकी सफल जोडी रही अभिनेत्री मौसमी चटर्जी के साथ। वे फिल्में थीं बासु चटर्जी की ‘उस पार’, जीतू ठाकुर की ‘दो झूठ’, दसारी नारायण राव की ‘स्वर्ग नरक’ और महमूद की ‘सबसे बड़ा रुपया’ ।
लगभग 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाले विनोद मेहरा की अन्य चर्चित फिल्मंे रहीं घर, अनुराग, स्वीकार करने मैंने, दादा, बेमिसाल, जुर्माना, खुद्दार, साजन की सहेली, प्यार की जीत, बिन फेरे हम तेरे, साजन बिना सुहागन, नागिन, जानी दुश्मन और स्वर्ग नरक इत्यादि जिसमें उनके साथ थीं रेखा, बिन्दिया गोस्वामी, रीना रॉय, योगिता बाली, लीना चंद्रावरकर, राखी, हेमा मालिनी, सारिका, रंजीता, शबाना आजमी, नूतन, काजल किरन, मौसमी चटर्जी, माधवी और तमन्ना जैसी नायिकाएं।
राजकुमार कोहली, शक्ति सामंत, लेख टंडन, रिषीकेश मुखर्जी, भौमिक कृष्णन पंजू, आर0 कृष्णामूर्ति, एस0 रामानाथन, दसारी नारायण राव जैसे दिग्गज निर्माता-निदेशकों की कई मल्टीस्टारर फिल्मों में संजीव कुमार, अभिताम बच्चन, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, धर्मेन्द्र, राजेंद्र कुमार, राजकुमार व जितेंद्र जैसे दिग्गज नायकों के साथ सहनायक व सेकेंड लीड हीरो की भूमिका निभाते हुए भी विनोद मेहरा ने फिल्मी जगत में अपनी एक खास जगह बनाई।
मल्टी स्टारर फिल्मों में अभिनय करने के कारण उनकी पहचान सदैव सेंकेड लीड हीरो के रुप में रही परंतु अपने उत्कृष्ट अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने और अपनी एक अलग छवि बनाने में वे सदैव कामयाब रहे।
अपनी अभिनय प्रतिभा के कारण तीन बार फिल्म फेयर के बेस्ट सर्पोटिंग एक्टर के लिए वे नॉमिनेट भी हुए। ये फिल्मे थीं 1977 की ‘अनुरोध’, 1979 की ‘अमर दीप’ और 1982 में ऋषिकेश मुखर्जी की ‘बेमिसाल’।


हिन्दी फिल्मों के अलावा 1985 में पंजाबी फिल्म ‘मौजां दुबई दियां’ में भी उन्होंने बतौर नायक की भूमिका निभाई थी।
अभिनय के अलावा विनोद मेहरा अपनी विशिष्ट आवाज़ के लिए के लिये भी फिल्म इंडस्ट्री में विख्यात थे, जिसे सिने जगत ने उनकी फिल्मों को देखकर सदैव महसूस किया।
विनोद मेहरा पर फिल्माये गये गीत भी बेहद लोकप्रिय हुए। फिल्म ‘लाल पत्थर’ का गीत गाता हूं मैं, ‘दादा’ का दिल के टुकड़े टुकड़े करके, ‘स्वीकार किया मैंने’ का चांद के पास जो सितारा है, ‘घर’ का फिर वही रात है, आपकी आंखों में कुछ, ‘सबसे बड़ा रुपया’ का वादा करो जानम, ‘अनुराग’ का वो क्या है, ‘नागिन’ का तेरा मेरा मेरा तेरा, ‘बिन फिरे हम तेरे’ का साथी मेरे तुम जो मिले, ‘खुद्दार’ का डिस्को 82, ‘साजन की सहेली’ का तुमसे प्यारा और ‘बेमिसाल’ का कितनी खूबसूरत ये कश्मीर है इत्यादि। ये समस्त गीत आज भी संगीतप्रेमियों द््वारा सुने व गाये जाते हैं।
जीवन के अंतिम दिनों में उन्होंने चरित्र भूमिकाएं भी निभाईं। 90 के दशक में फिल्म ‘बेग़ाना’ में अभिनेता कुमार गौरव के बडे़ भाई, मिथुन चकवर्ती व माधुरी दीक्षित के साथ फिल्म ‘प्रेम प्रतिज्ञा’ और फिल्म ‘पत्थर के फूल’ में सलमान खान और रविना टंडन के साथ और सत्यमेय जयते में विनोद खन्ना, मीनाक्षी शेषाद्री और माधवी के साथ वे चरित्र भूमिकाओं में नजर आये और इन भूमिकाओं में भी वे दर्शकों का दिल जीतने में पुनः कामयाब रहे।
साल 1990 में विनोद मेहरा ने अभिनेता अनिल कपूर, ऋषि कपूर व श्रीदेवी के साथ फिल्म ‘गुरुदेव’ बनाई, फिल्म निर्माण कार्य प्रारंभ ही किया था कि वे बीमार पड गये और ये फिल्म पूरी ना कर सके। बाद में उनके मित्र राज़ सिप्पी ने फिल्म गुरुदेव का निर्माण कार्य पूरा किया, परंतु फिल्म असफल रही।
30 अक्टूबर 1990 को अपने चाहने वालों से सदैव मुस्कराते रहने का अनुरोध करता हुआ यह मुस्कराता हुआ कलाकार मात्र 45 वर्ष की अल्पायु में इस अथाह संसार को अलविदा कहकर हमेशा-हमेशा के लिए चिरनिद्रा में सो गया।

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लेखिका – बबिता बसाक

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